चिड़िया और शैतान आदमी की कहानी
यह कहानी एक चिड़िया और शैतान आदमी की है। चिड़िया रोज़ अपना घोंसला बनाती थी, जबकि शैतान आदमी उसे तोड़ देता था। यह काम महीनों तक चलता रहा, लेकिन चिड़िया कभी भी निराश नहीं हुई। अंत में, शैतान आदमी हार मानकर गिया। चिड़िया ने फिर अपने घोंसले में अंडे दिए, जिनसे प्यारे-प्यारे बच्चे निकले। उसके बाद, आदमी भी उनकी देखभाल करने लगा। जब उसने पूछा कि वह ऐसा क्यों करता रही, तो चिड़िया ने कहा कि उसने उसको सहन किया क्योंकि वह खुद भी मेहनत कर रही थी।
चिड़िया और शैतान आदमी की कहानी एक चिड़िया रोज अपना घोंसला बनाने के लिए तिनके इकट्ठा करती थी और वह शैतान आदमी रोज उस चिड़िया का घोंसला तोड़ देता था ऐसा कई महीनों तक चलता रहा परंतु चिड़िया ने घोंसला बनाना बंद नहीं किया लेकिन उस शैतान आदमी ने आखिर थक हारकर चिड़िया का घोंसला तोड़ना बंद कर दिया और फिर कुछ ही दिनों में चिड़िया ने अपने घोंसले में अंडे दिए जिनमें से प्यारे-प्यारे चिड़िया के बच्चे बाहर आए उन नन्हे नन्हे प्यारे बच्चों को देखकर वह आदमी भी बहुत खुश हुआ उनकी देखभाल करने लगा उनके लिए दाने डालने लगा एक दिन उसने चिड़िया से पूछा कि मैं तो तुम्हारा घोंसला रोज तोड़ देता था परंतु तुमने अपना काम करना बंद क्यों नहीं किया तो चिड़िया ने कहा कि भैया आप अपना काम कर रहे थे और मैं अपना
कहानी से सीख
चिड़िया और शैतान आदमी की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि संघर्षों के बावजूद, अपने लक्ष्य के प्रति पक्षपात न बदलें। चिड़िया ने कभी हार नहीं मानी और अपने घोंसले का निरंतर ध्यान रखा। उसने अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई, जो शैतान आदमी को भी प्रेरित किया। इस कहानी से हमें यह भी सिखने को मिलता है कि अगर हम अपने मकसद के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो हमें कभी भी अपनी मेहनत और निर्णायकता से हार नहीं माननी चाहिए। इसके बजाय, हमें अपने मकसद की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए और परिश्रम करना चाहिए।
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